पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- एक अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) ने 1,100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के परिसंपत्ति मौद्रीकरण संबंधी प्रस्तावों को विचारार्थ और अनुमोदन हेतु मंत्रिमंडल द्वारा प्रत्यायोजित वैकल्पिक तंत्र (AM) के समक्ष प्रस्तुत करने की सिफारिश की है।
परिचय
- IMG ने मुख्य रूप से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) की अधिशेष भूमि और भवन परिसंपत्तियों से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की।
- इन सिफारिशों का उद्देश्य अधिशेष और अल्प-उपयोग की जा रही सार्वजनिक परिसंपत्तियों के उत्पादक उपयोग को सुगम बनाना तथा सरकारी संस्थाओं के लिए आर्थिक मूल्य का सृजन करना है।
- इन प्रस्तावों को अब विचारार्थ और अनुमोदन हेतु मंत्रिमंडल द्वारा प्रत्यायोजित वैकल्पिक तंत्र के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
परिसंपत्ति मौद्रीकरण
- परिसंपत्ति मौद्रीकरण के अंतर्गत अब तक अनुपयोगी या अल्प-उपयोग की जा रही सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मूल्य को अनलॉक करके राजस्व के नए स्रोतों का सृजन किया जाता है।
- इन परिसंपत्तियों को व्यापक रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- भूमि और भवन: भूमि एवं भवन संबंधी परिसंपत्तियाँ।
- ब्राउनफील्ड परिचालन परिसंपत्तियाँ: पाइपलाइन, सड़कें, मोबाइल टावर आदि जैसी पहले से परिचालन में वर्तमान परिसंपत्तियाँ।
- वित्तीय परिसंपत्तियाँ: इक्विटी शेयर, ऋण प्रतिभूतियाँ तथा अन्य हाइब्रिड/संरचित वित्तीय परिसंपत्ति इकाइयाँ आदि।
- निर्णय लेने वाले निकाय:
- वैकल्पिक तंत्र (AM): इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री तथा संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय के मंत्री शामिल होते हैं।
- अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG): इसकी अध्यक्षता/सह-अध्यक्षता सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) के सचिव और प्रशासनिक विभाग के सचिव द्वारा की जाती है।
- व्यय विभाग, विधि कार्य विभाग, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और वित्तीय सलाहकार (DPE) के प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव (JS) से नीचे के पद के न हों, IMG के सदस्य होंगे।
- IMG अपने विवेक के अनुसार किसी अन्य सदस्य को भी शामिल कर सकता है।
परिसंपत्ति मौद्रीकरण कार्यक्रम
- यह पहल सरकार के व्यापक परिसंपत्ति मौद्रीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका उद्देश्य व्यवस्थित मूल्यांकन, पेशेवर लेन-देन की तैयारी और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के माध्यम से CPSEs तथा अन्य सरकारी संस्थाओं को अधिशेष परिसंपत्तियों की आर्थिक क्षमता का उपयोग करने में सहायता प्रदान करना है।
- राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC), जो अधिशेष भूमि और अन्य गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण के लिए सरकार की विशेष एजेंसी है, इस प्रक्रिया को सुगम बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह संबंधित मंत्रालयों, विभागों और परिसंपत्ति स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करता है।
- यह परिसंपत्तियों का मूल्यांकन, समुचित जाँच-पड़ताल, मूल्य निर्धारण, लेन-देन की संरचना तैयार करने तथा बाज़ारोन्मुख मौद्रीकरण संबंधी गतिविधियों को संपन्न करता है।
- सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन में सुधार करना, मौद्रीकरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा निवेश एवं आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए अधिशेष परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य प्राप्त करना है।
राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) के बारे में
- राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (NLMC) भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व वाला उपक्रम है, जो वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उद्यम विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
- इसकी स्थापना केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई घोषणा के बाद हुई थी।
- NLMC पेशेवर लेन-देन संबंधी परामर्श, समुचित जाँच-पड़ताल, मूल्य निर्धारण तथा पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी मौद्रीकरण प्रक्रियाओं के माध्यम से CPSEs और सरकारी संस्थाओं की अधिशेष भूमि तथा अन्य गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण को सुगम बनाता है।
राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 (NMP 2.0) के बारे में
- केंद्रीय बजट 2025-26 में परिचालनरत सार्वजनिक अवसंरचना परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण को सतत अवसंरचना वित्तपोषण के एक प्रमुख माध्यम के रूप में चिह्नित किया गया।
- बजट में ‘राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 (NMP 2.0)’ तैयार करने का प्रावधान किया गया।
- NMP 2.0 का उद्देश्य सार्वजनिक परिसंपत्ति स्वामियों के लिए कार्यक्रम का मध्यम अवधि का रोडमैप उपलब्ध कराना तथा निजी क्षेत्र को संभावित परिसंपत्तियों के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान करना है।
- ढाँचा: परिसंपत्ति मौद्रीकरण में निम्नलिखित तत्त्व शामिल होंगे:
- सीमित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का हस्तांतरण।
- अतिरिक्त पूंजी प्राप्त करने के लिए सूचीबद्ध संस्थाओं में हिस्सेदारी के कुछ भाग का विनिवेश।
- नकदी प्रवाह का प्रतिभूतिकरण।
- रणनीतिक वाणिज्यिक नीलामी।
- NMP 2.0 को पाँच चरणों में विभाजित किया गया है:

- परिसंपत्ति मौद्रीकरण परियोजनाओं से प्राप्त राशि का आवंटन चार अलग-अलग मदों के अंतर्गत किया जाता है:
- भारत की संचित निधि: केंद्रीय मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित मौद्रीकरण परियोजना से प्राप्त किसी भी प्रकार का सरकारी राजस्व (उदाहरण के लिए, राजस्व में हिस्सेदारी, प्रीमियम, पट्टा किराया और रॉयल्टी) भारत की संचित निधि में जमा किया जाएगा।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/बंदरगाह प्राधिकरणों को आवंटन: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा की गई मौद्रीकरण गतिविधियों से प्राप्त राशि संबंधित PSU को प्राप्त होगी। प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरणों के लिए भी इसी प्रकार के मानदंड का पालन किया जाएगा।
- राज्य की संचित निधि: NMP 2.0 के अंतर्गत कुछ परियोजनाओं से राज्य सरकारों को राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। इनमें विशेष रूप से खनन और कोयला क्षेत्र से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनसे रॉयल्टी का भुगतान प्राप्त होगा। यह राशि राज्य की संचित निधि में जमा की जाएगी।
- प्रत्यक्ष निवेश (निजी क्षेत्र): इस मद के अंतर्गत उन मौद्रीकरण परियोजनाओं में निजी क्षेत्र द्वारा किए गए निवेश को दर्ज किया जाएगा, जिनमें निर्माण और/या बड़े पैमाने पर रखरखाव के घटक शामिल हैं।
स्रोत: DD